(N/A) $1$. बंध की ध्रुवीयता निर्धारित करने के लिए: चूंकि $\mu = q \times d$,द्विध्रुव आघूर्ण का परिमाण जितना अधिक होगा,बंध की ध्रुवीयता उतनी ही अधिक होगी। $A-B$ प्रकार के अणु के लिए,क्रम $HF > HCl > HBr > HI$ है। यदि $\mu = 0$ है,तो अणु अध्रुवीय है (जैसे,$O_2, N_2, F_2, Cl_2, Br_2, I_2, H_2$)।
$2$. अणु का आकार (सममिति) निर्धारित करने के लिए: $BeF_2, CO_2, BeCl_2$ जैसे अणुओं के लिए $\mu = 0$ है,इसलिए वे रैखिक हैं। $H_2O, SO_2$ के लिए $\mu \neq 0$ है,इसलिए वे कोणीय आकार के हैं। इसी प्रकार,$BF_3, CH_4, CCl_4$ अध्रुवीय हैं,जबकि $NF_3, NH_3, CH_3Cl$ ध्रुवीय हैं।
$3$. आयनिक या सहसंयोजक चरित्र की गणना: आयनिक चरित्र विद्युत ऋणात्मकता के अंतर के समानुपाती होता है। $HI, HBr, HCl, HF$ में आयनिक चरित्र बढ़ता है।
$4$. सिस (cis) और ट्रांस (trans) आइसोमर्स के बीच अंतर करने के लिए: सिस आइसोमर्स के लिए $\mu \neq 0$,जबकि ट्रांस आइसोमर्स के लिए $\mu = 0$ होता है।
$5$. ऑर्थो,मेटा और पैरा आइसोमर्स के बीच अंतर करने के लिए: पैरा आइसोमर्स के लिए $\mu = 0$ होता है और ऑर्थो आइसोमर का द्विध्रुव आघूर्ण मेटा आइसोमर से अधिक होता है।